कार्यकर्ताओं से ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर, प्रत्याशियों ने बदली रणनीति
जोधपुर। नगर निगम चुनाव का प्रचार जैसे-जैसे अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है, चुनावी मैदान में प्रचार के पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ सोशल मीडिया का प्रभाव भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रत्याशियों के लिए अब केवल घर-घर संपर्क और कार्यकर्ताओं की टोली ही पर्याप्त नहीं मानी जा रही, बल्कि कम समय में बड़ी संख्या में मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने वाले सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर और स्थानीय डिजिटल क्रिएटर भी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं।
जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। नामांकन वापसी के बाद 385 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में अधिकांश वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय होने के कारण प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मतदाताओं तक अपनी पहचान और मुद्दे प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है।
एक पोस्ट से हजारों लोगों तक पहुंच
पारंपरिक चुनाव प्रचार में कार्यकर्ताओं को अलग-अलग मोहल्लों और घरों तक पहुंचने में समय लगता है। इसके विपरीत स्थानीय सोशल-मीडिया क्रिएटर का एक वीडियो, लाइव कार्यक्रम या पोस्ट कुछ ही समय में हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि कई प्रत्याशी अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों, स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत छवि को डिजिटल माध्यमों पर प्रमुखता से दिखाने पर जोर दे रहे हैं।
विशेषकर युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने में सोशल मीडिया को महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। जयपुर निकाय चुनाव में भी युवा पीढ़ी के प्रत्याशियों की सक्रिय भागीदारी सामने आई है, जो स्थानीय राजनीति में बदलती चुनावी शैली का संकेत देती है।
कार्यकर्ता की भूमिका खत्म नहीं, लेकिन स्वरूप बदल रहा
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं की जगह पूरी तरह ले रहा है। मतदान के दिन बूथ प्रबंधन, मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने में कार्यकर्ताओं की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण रहेगी।
लेकिन चुनाव प्रचार के स्तर पर समीकरण बदल रहे हैं। पहले जहां प्रत्याशी की लोकप्रियता मुख्य रूप से व्यक्तिगत संपर्क, पोस्टर-बैनर और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क से बनती थी, वहीं अब स्थानीय पहचान + सोशल मीडिया पहुंच + जमीनी संगठन का संयोजन अधिक प्रभावी चुनावी मॉडल बनता दिखाई दे रहा है।
‘लोकल इन्फ्लुएंसर’ बन रहे चुनावी संचार का नया माध्यम
राष्ट्रीय स्तर के बड़े सोशल-मीडिया चेहरों की तुलना में स्थानीय इन्फ्लुएंसर प्रत्याशियों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं, क्योंकि वे वार्ड की भाषा, स्थानीय समस्याओं और क्षेत्र की सामाजिक परिस्थितियों से परिचित होते हैं।
सड़क, पानी, सफाई, सीवरेज, पार्क, यातायात और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर बनाया गया छोटा वीडियो सीधे उस क्षेत्र के मतदाताओं से संवाद स्थापित कर सकता है।
त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबलों में बढ़ेगी भूमिका
जोधपुर में नाम वापसी के बाद कई वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी है। ऐसे चुनाव में प्रत्याशी के लिए अपनी पहचान को जल्दी मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसलिए सोशल मीडिया प्रचार का महत्व और बढ़ जाता है।
हालांकि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। स्थानीय संगठन, प्रत्याशी की व्यक्तिगत स्वीकार्यता, जातीय-सामाजिक समीकरण, पिछले कार्यों की छवि और मतदान के दिन की बूथ रणनीति जैसे कारक भी परिणाम को प्रभावित करेंगे।
निष्कर्ष
जोधपुर नगर निगम चुनाव 2026 में चुनाव प्रचार का स्वरूप स्पष्ट रूप से बदलता दिखाई दे रहा है। कार्यकर्ता जहां प्रत्याशी को मतदाता के घर तक पहुंचाते हैं, वहीं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रत्याशी की आवाज को हजारों लोगों तक पहुंचाने का काम कर सकते हैं।
इसी कारण आने वाले दिनों में कई प्रत्याशियों के लिए सवाल केवल यह नहीं रहेगा कि “मेरे साथ कितने कार्यकर्ता हैं?” बल्कि यह भी होगा कि “मेरी बात कितने लोगों तक और कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही है?”
यही बदलाव जोधपुर के निकाय चुनाव को पारंपरिक राजनीति के साथ-साथ डिजिटल चुनाव प्रचार की नई प्रयोगशाला भी बना रहा है।
PJS News जानो सच को